Astra-II मिसाइल की 6000 KMPH की स्पीड, DRDO को मिला चीन का तोड़

Astra-II मिसाइल की 6000 KMPH की स्पीड, DRDO को मिला चीन का तोड़

Astra-II Missile: PL-15ई मिसाइल को 9 मई को पंजाब के होशियारपुर के निकट एक खेत से पूरी तरह सुरक्षित बरामद किया गया, जो भारतीय रक्षा वैज्ञानिकों के लिए एक दुर्लभ खुफिया अवसर था। PL-15ई मिसाइल भारतीय हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के विपरीत, हथियार में आत्म-विनाश तंत्र की कमी के कारण बिना विस्फोट के पाया गया।

Astra-II Missile: भारत ने देसी तकनीक से मिसाइल और फाइटर जेट बनाने की मुहिम को रफ्तार दे दी है। भारत अपने डिफेंस सिस्टम को लगातार अपग्रेड कर रहा है। 21वीं सदी में दुनिया दो बड़े युद्ध की गवाह बन चुकी है। रूस-यूक्रेन और इजरायल-हमास-ईरान युद्ध ने नेशनल सिक्‍योरिटी मेकेनिज्‍म को बदल कर रख दिया है।

डिफेंस सिस्टम लगातार अपग्रेड

वहीं अब भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने चीनी PL-15 मिसाइल का विश्लेषण करने के बाद उसकी कुछ उन्नत विशेषताओं को देश में विकसित हो रही एस्ट्रा मार्क-2 मिसाइल परियोजना में शामिल करने का फैसला लिया है।

PL-15 मिसाइल पंजाब में मिली

PL-15ई मिसाइल को 9 मई को पंजाब के होशियारपुर के निकट एक खेत से पूरी तरह सुरक्षित बरामद किया गया, जो भारतीय रक्षा वैज्ञानिकों के लिए एक दुर्लभ खुफिया अवसर था। PL-15ई मिसाइल भारतीय हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के विपरीत, हथियार में आत्म-विनाश तंत्र की कमी के कारण बिना विस्फोट के पाया गया।

इसके बाद इसकी विशेषताओं का परीक्षण किया गया। जिसे अब DRDO PL-15 मिसाइल की खास‍ियतों को एस्ट्रा मार्क-2 मिसाइल में एड करने का निर्णय लिया है।

क्यों अहम है यह कदम

यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 200+ किमी रेंज वाली BVR (बियॉंड विजुअल रेंज) क्षमता का अर्थ यह है कि भारतीय पायलट दुश्मन के हवाई क्षेत्र में दाखिल हुए बिना ही लक्ष्यों पर प्रभावी हमला कर सकते हैं, जिससे पायलटों और एयरफ्रेम की सुरक्षा बढ़ती है।

कार्यक्षमता दोनों में होगा इजाफा

साथ ही देशी तकनीक का फायदा भी स्पष्ट है कि पाकिस्तान की निर्भरता चीनी PL‑15 जैसी मिसाइलों पर है, और भारत अपने स्वदेशी विकल्प के जरिए उसे मात देना चाहता है। जब ऐसी मिसाइलें फ्रंटलाइन स्क्वाड्रनों में सुखोई और LCA जैसे एयर‑फ्रेम्स के साथ एकीकृत होंगी, तो भारतीय वायुसेना की प्रभावी दबाव और कार्यक्षमता दोनों में इजाफा होगा।

हालांकि रेंज बढ़ाने से कई फायदे हैं, पर तकनीकी चुनौतियां भी बढ़ जाती हैं जैसे कि रेंज के साथ मार्गदर्शन प्रणाली, प्रणोदक और सीकर/फ्यूजिंग जटिल हो जाते हैं और उनकी सटीकता बनाए रखना कठिन होता है। इसके अलावा, किसी भी मिसाइल को एयर‑फ्रेम के साथ सही ढंग से तालमेल बिठाना (इंटीग्रेशन) भी चुनौतीपूर्ण होता है। हार्डवेयर‑सॉफ्टवेयर इंटरफेस, सॉफ्टवेयर टेस्टिंग और फायरिंग प्रोफाइल मिलाना समय और संसाधन मांगता है।

Admin

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