कनाडा और फिलीपीन का रणनीतिक रक्षा साझेदारी, चीन को चुनौती

कनाडा और फिलीपीन का रणनीतिक रक्षा साझेदारी, चीन को चुनौती

China Dispute: चीन दक्षिण चीन सागर के लगभग पूरे हिस्से पर अपना दावा करता है, जबकि 2016 में दिए गए अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण के फैसले ने 1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (UNCLOS) के आधार पर इन दावों को अवैध और अमान्य करार दिया था।

China Dispute: दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती आक्रामकता के बीच कनाडा और फिलीपींस ने रविवार को महत्वपूर्ण रक्षा समझौते पर साइन किए।

इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास को बढ़ावा देना और क्षेत्र में किसी भी तरह की आक्रामकता को रोकना है। अधिकारियों ने बताया कि यह कदम क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।

बीजिंग का दक्षिण चीन सागर पर दावा

गौरतलब है कि चीन दक्षिण चीन सागर के लगभग पूरे हिस्से पर अपना दावा करता है, जबकि 2016 में दिए गए अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण के फैसले ने 1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (UNCLOS) के आधार पर इन दावों को अवैध और अमान्य करार दिया था। 

हालांकि चीन ने इस नए समझौते पर अब तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। बीजिंग पहले ही फिलीपींस पर अमेरिका और अन्य देशों के साथ संयुक्त गश्त और युद्धाभ्यास करने को लेकर आरोप लगा चुका है कि वह “संकट पैदा कर रहा है” और “क्षेत्रीय स्थिरता को नुकसान पहुँचा रहा है।

दक्षिण चीन सागर से हिंद-प्रशांत तक चुनौती

कनाडा और अन्य पश्चिमी देश हाल के वर्षों में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भी अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ा रहे हैं, ताकि कानून के शासन को सुदृढ़ किया जा सके और क्षेत्र में व्यापार व निवेश को प्रोत्साहन मिले। इसी क्रम में फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर लगातार अन्य देशों के साथ रक्षा साझेदारी को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे उनका देश विवादित जल क्षेत्र में सैन्य रूप से अपेक्षाकृत अधिक शक्तिशाली चीन का बेहतर सामना कर सके। यह साझेदारी दक्षिण चीन सागर से लेकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र तक चीन को चुनौती पेश करेगी।

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